छोटी नैतिक कहानियाँ
पढ़ो, सीख समझो, फिर हर कहानी के चार सवाल खेलो।
- 🌱 रीना का बीज
- 🦜 मिठ्ठू का सच
- 🐜 चींटियों की टोली
- ☂️ एक छाता, दो दोस्त
- 🚰 टपकता नल
- 🌳 गोलू और बूढ़ा पेड़
🌱 रीना का बीज
रीना ने अपने आँगन में एक छोटा-सा बीज बोया। उसने उस पर पानी डाला और सोचा, “कल सुबह तक पौधा निकल आएगा।”
अगली सुबह कुछ नहीं निकला। रीना ने मिट्टी खोदकर देखा — बीज वैसा ही था। उसने बीज फिर से दबा दिया। अगले दिन भी उसने यही किया।
दादी ने मुस्कुराकर कहा, “बेटी, बीज को रोज़ खोदोगी तो वह कैसे उगेगा? उसे पानी दो, धूप दो और इंतज़ार करो।”
रीना ने अब मिट्टी नहीं खोदी। वह रोज़ बस थोड़ा पानी डालती रही। एक हफ़्ते बाद मिट्टी से दो हरी पत्तियाँ झाँकने लगीं। रीना खुशी से उछल पड़ी।
सीख: अच्छे काम का फल पाने के लिए धैर्य रखना पड़ता है।
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🦜 मिठ्ठू का सच
मिठ्ठू तोता फलवाले की दुकान के पास पेड़ पर रहता था। एक दिन वह उड़ते-उड़ते दुकान की टोकरी से टकरा गया और ढेर सारे अमरूद नीचे गिर गए।
फलवाले ने पूछा, “ये अमरूद किसने गिराए?” पास में एक बिल्ली बैठी थी। मिठ्ठू चाहता तो कह सकता था कि बिल्ली ने गिराए।
पर मिठ्ठू ने कहा, “माफ़ कीजिए, गलती मेरी है। मैं ध्यान से नहीं उड़ रहा था।” फिर उसने चोंच से अमरूद उठाकर टोकरी में रखने में मदद की।
फलवाला खुश हुआ। बोला, “सच बोलने वाला दोस्त मुझे बहुत प्यारा है।” और उसने मिठ्ठू को एक पका हुआ अमरूद इनाम में दिया।
सीख: गलती हो जाए तो सच बोलो — सच बोलने वाले पर सब भरोसा करते हैं।
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🐜 चींटियों की टोली
एक चींटी को ज़मीन पर रोटी का बड़ा टुकड़ा मिला। उसने उसे उठाने की कोशिश की, पर टुकड़ा हिला तक नहीं।
चींटी ने हार नहीं मानी। वह दौड़कर अपनी सहेलियों को बुला लाई। “आओ, सब मिलकर उठाते हैं!”
दस चींटियों ने टुकड़े को चारों ओर से पकड़ा। “एक, दो, तीन — उठाओ!” टुकड़ा ऊपर उठ गया।
सब चींटियाँ गीत गाती हुईं टुकड़े को अपने घर ले गईं। उस रात पूरी टोली ने मिलकर दावत की।
सीख: जो काम अकेले मुश्किल लगे, वह मिलकर आसानी से हो जाता है।
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☂️ एक छाता, दो दोस्त
छुट्टी के समय ज़ोर से बारिश होने लगी। अमन के पास छाता था, पर उसका दोस्त राजू छाता भूल आया था।
अमन ने कहा, “आओ राजू, हम दोनों एक ही छाते में चलेंगे।” दोनों थोड़े-थोड़े भीगे, पर हँसते-गाते घर पहुँच गए।
अगले दिन अमन का टिफ़िन घर पर छूट गया। खाने की छुट्टी में उसे भूख लगी थी।
राजू ने अपना टिफ़िन खोला और बोला, “आज मेरी बारी! आधी रोटी तुम्हारी।” दोनों ने साथ बैठकर खाना खाया।
सीख: बाँटने से खुशी बढ़ती है, और अच्छा दोस्त ज़रूरत में साथ देता है।
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🚰 टपकता नल
तारा ब्रश करते समय नल खुला छोड़ देती थी। आँगन का नल भी रात भर टप-टप टपकता रहता था।
एक शाम दादाजी ने टपकते नल के नीचे एक खाली बाल्टी रख दी और कहा, “सुबह देखना।”
सुबह तारा ने देखा — बाल्टी आधी भर चुकी थी! दादाजी बोले, “इतना पानी तो सिर्फ़ बूँद-बूँद टपककर बेकार जा रहा था।”
उस दिन से तारा ब्रश करते समय नल बंद रखती है। उसने पापा से कहकर टपकता नल भी ठीक करवा दिया।
सीख: बूँद-बूँद से घड़ा भरता है — पानी बचाओ।
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🌳 गोलू और बूढ़ा पेड़
गोलू के स्कूल के रास्ते में एक बूढ़ा नीम का पेड़ था। गर्मी में उसकी पत्तियाँ सूखने लगीं।
गोलू रोज़ घर से एक बोतल पानी लाता और पेड़ की जड़ में डाल देता। दोस्त हँसते, “इतने बड़े पेड़ को एक बोतल से क्या होगा?”
गोलू कहता, “थोड़ा ही सही, पर मैं रोज़ दूँगा।” धीरे-धीरे उसके दोस्त भी पानी लाने लगे। फिर बारिश आई और पेड़ फिर से हरा-भरा हो गया।
अब सब बच्चे खेलकर थक जाते हैं तो उसी पेड़ की ठंडी छाँव में बैठते हैं।
सीख: छोटी-छोटी अच्छी कोशिशें मिलकर बड़ा बदलाव लाती हैं — पेड़ों की देखभाल करो।
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